फिर याद मुझे तुम कर लेना
कुछ वक़्त गुज़र सा जाने दो फिर याद मुझे तुम कर लेना सूरज को सर पर आने दो फिर याद मुझे तुम कर लेना है ढोंग हमारा रिश्ता अब तुम मानो या फिर ना मानो इस सच को घर कर जाने दो फिर याद मुझे तुम कर लेना
कुछ वक़्त गुज़र सा जाने दो फिर याद मुझे तुम कर लेना सूरज को सर पर आने दो फिर याद मुझे तुम कर लेना है ढोंग हमारा रिश्ता अब तुम मानो या फिर ना मानो इस सच को घर कर जाने दो फिर याद मुझे तुम कर लेना
चलो, इंद्रधनुष के अंत तक चलें | सुना है वहाँ परियाँ मटकियों में सोने के सिक्के छिपाती हैं, वहाँ एक सपनों की दुकान करते हैं – हरे गुलाबी रजनीगंधा की खुशबू वाले दिन में टिमटिमाते सपने | उनको कोई ग़रीबन की बेटी बालों में जूड़े संग गूथ लेगी, या कोई फकीरन का बच्चा आँसुओं संग… Read More चलो, तुमको लेकर चलें
X’s father, Muhammad Sarvar Khan, was a fruit merchant from Peshavar settled in Mumbai. He wanted his son, X, to become an administrative official and an OBE. In parts, this was because of the respect he saw accorded to a certain Basheswarnath, a government official in Peshavar during the pre-independence era. Basheswarnath’s son and grandsons… Read More The Friday Quiz – #10