कुछ वक़्त गुज़र सा जाने दो फिर याद मुझे तुम कर लेना
सूरज को सर पर आने दो फिर याद मुझे तुम कर लेना
है ढोंग हमारा रिश्ता अब तुम मानो या फिर ना मानो
इस सच को घर कर जाने दो फिर याद मुझे तुम कर लेना
मैं आज तुम्हारा आज नहीं पर आज भी तुमसे ज़िंदा हूँ
मर जाने दो मर जाने दो फिर याद मुझे तुम कर लेना
कुछ झगड़ा तुमने छेड़ा था कुछ बात को हमने बढ़ने दिया
इलज़ाम मेरे सर आने दो फिर याद मुझे तुम कर लेना
जिस मोड़ पे तुमने छोड़ा था मैं आज वहीं पर तनहा हूँ
तनहाई को बढ़ जाने दो फिर याद मुझे तुम कर लेना
मैं तुमको याद नहीं आता मैं तुमको भूल नहीं पाता
इस हाल में अंतर आने दो फिर याद मुझे तुम कर लेना
दिल इक पंछी सा फंस बैठा जब जाल उमीदों ने फेंका
सय्याद से अब लड़ जाने दो फिर याद मुझे तुम कर लेना
कोई जो अगर तुमसे पूछे तो कह देना सब ठीक ही है
हो झूठ सही पर जाने दो फिर याद मुझे तुम कर लेना
जो मेरे विरसे आए थे वह ज़ख़्म अभी तक ताज़ा हैं
उन ज़ख़्मों को भर जाने दो फिर याद मुझे तुम कर लेना
वारिस का जनाज़ा खूब उठा सब हँसने वाले आए थे
अब लाश मेरी सड़ जाने दो फिर याद मुझे तुम कर लेना
This reads so beautifully. I love the tune it creates. Don’t we all wish that we were remembered so?
Thanks for the appreciation. 🙂 Perfectly said, we all wish to be remembered and also not be forgotten by those dear to us.