खुद को मिला हूँ मैं तेरी खैरात की तरह
और लुट गया हूँ मैं मेरे जज़्बात की तरह
मालूम है क़िस्मत में हमारे नहीं मगर
मिलते भी नहीं हमको मुलाक़ात की तरह
हर रात तेरी याद रुलाती है और तुम
हर रात रुला जाते हो हर रात की तरह
माँगा नहीं खुदा से कोई तेरे अलावा
लब पर सजे हो मेरे मुनाजात की तरह
दिन रात की तरह तुम्हें ढूँढा है रात दिन
फिर भी नहीं मिले मुझे दिन रात की तरह
सीने में मुहर्रम का जनाज़ा है रोज़ ओ शब्
चेहरे पे ईद सजती है बारात की तरह
तुझसे बिछड़ के मौत की मांगी थी इक दुआ
ये भी बनी नहीं मेरी हर बात की तरह
जैसे मेरी खुशियों का न ज़र्रा बचा कोई
यह ग़म भी गुज़र जाएगा औक़ात की तरह
रोएगा नहीं कोई तेरी क़ब्र पे वारिस
हालात बदलते नहीं हालात की तरह