औक़ात ए खमसा

Innas-Salaat

दुआ बाशक्ल सवाब ए जारिया

खुदा करे कि नया साल इस क़दर गुज़रे
मेरी पढ़ते हुए नमाज़ हर फजर गुजरे

घनी जो छाँव तेरी रहमतों कि हो हम पर
धूप का खौफ किसे हो जो यूं ज़ुहर गुजरे

जो चाहते हो हो असर दुआओं में अपनी
तो चाहिए कि दुआओं में हर असर गुजरे

दिल हो सजदे में मेरा जब घड़ी हो मग़रिब की
जो वक़्त गुजरे तो जा-ए-नमाज़ पर गुजरे

बहुत सुकूँ की मौत होगी तुम्हारी वारिस
खुदा के इश्क में इशा जो बेसबर गुजरे

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