तुम्हारे जाने के बाद कई दिनों तक तो दिल उदास रहा,
और मुझे ये उम्मीद लगी रही
कि शायद तुम वापस आओगी
और सब कुछ पहले जैसा हो जाएगा।
घर लौटने पर तुम्हारे सियाह जूते वैसे ही रखे होंगे,
दरवाज़े के करीब,
और तुम अंदर वाले कमरे में कोई नई तस्वीर बनाती होगी।
जिसे मेरे आने पर छोड़ कर मुझसे लिपट जाओगी
और मैं तुमसे।
अभी बारिश का मौसम है यहाँ।
कल बहुत ज़ोर बरसात हो रही थी।
बिजली की आवाज़ सुन्कर तुम्हारी याद आ गई।
पिछले साल ऐसे ही बरसात के मौसम में
बिजली के तेज कड़कने से तुम डर जाया करती थी।
और मुझमें समा जाया करती।
और मेरा वजूद तुममें।
अब भी जब घर में अकेले होता हूं तो तुम्हारी यादें
हर कोने से निकल कर बाहर आती हैं।
कभी अंधकार में उजाला करती हैं,
तो कभी उजाले में अंधकार।
अब भी घर साफ करता हूँ
तो तुम्हारी आवाज़ गूँजती है,
किसी गीत को गुनगुनाते हुए।
तुम्हारे सारे प्रिय गीत भी तो याद हैं।
क्या क्या भूलूँ अब?
सोचता हूँ घर ही बेच दूँ।
तुम्हारे टूटे बालों के टुकड़े
आज भी घर के कोनों में मिला करते हैं।
बहुत कुछ था हमारा जिन्हें आज
मेरा और तुम्हारा में बाँटना पड़ रहा है।
जो कुछ तुम्हारा है उसे अलग रख दिया है,
इस उम्मीद में, कि शायद
ज़िन्दगी के किसी मोड़ पे तुम फिर मिलोगी,
और तुम्हारा तुमको लौटा दूँगा।
जो मेरा है उसे सीने से लगा कर रोने का मन करता है,
पर आँसू तुम्हारी यादों की बेईज्ज़ती से लगते हैं।
कुछ किताबें हैं तुम्हारी
और कुछ लिखे हुए कागज के पन्ने।
तुम्हारी लिखावट देख कर आज भी पहचान जाता हूँ।
कुछ साथ बैठ कर सोचा था कभी,
यह करेंगे वह करेंगे,
सब अधूरों को अकेले पूरा करने की
अब न इच्छा है न हिम्मत।
कुछ तोहफे हैं जो तुमने दिए थे।
क्या करूँ उनका, पता नहीं।
बस हाथों में थामे बैठे रहने से अच्छा लगता है।
उनसे ही सिसकियों में दिल की बात कह देता हूं।
सोचता हूँ कि मेरे दिए तोहफे क्या अब भी तुम्हारे पास होंगे?
क्या आज भी उन्हें देख कर तुम्हें मेरी याद आती होगी?
क्या क्या तोड़ूँ, क्या क्या लौटाऊँ,
क्या क्या छुपा कर भूल जाऊँ?
तुम्हारी आवाज़, तुम्हारी महक, तुम्हारी सूरत?
तुम्हारे सांसों की गरमी, तुम्हारे स्पर्श की नरमी?
आंखें, होंट, उंगलियाँ, क्या क्या भुला दूँ?
तुम्हारे गरदन का तिल, जुल्फों की खुशबू,
जिस्म के उतार चढ़ाव, सब ही तो याद हैं।
पहला प्यार, पहली मुस्कुराहट,
पहली बार किसी को अपना बनाना,
पहली बार किसी का हो जाना,
किसी की बाहों में खो जाना,
किसी के कंधे पर सर रख कर सो जाना,
दिन रात हफ्ते महीने साल,
सावन भादो की बरसातें
फरवरी का महीना, जून की रातें,
रूठना मनाना, प्यार जताना, नाज़ उठाना,
कुछ भी तो नहीं बचा तुम्हारे जाने के बाद।