वो बिगड़ता है तो बिगड़ जाए
वो बिगड़ता है तो बिगड़ जाए ये बता दे कि दिल किधर जाए मेरा दिल है गले का हार नहीं ज़रा सी चोट पे बिखर जाए ज़रा सा दर्द तो होगा लेकिन ये दुआ है कि दिल ठहर जाए
Collection of Urdu Poetry
वो बिगड़ता है तो बिगड़ जाए ये बता दे कि दिल किधर जाए मेरा दिल है गले का हार नहीं ज़रा सी चोट पे बिखर जाए ज़रा सा दर्द तो होगा लेकिन ये दुआ है कि दिल ठहर जाए
है ये जानता अह्द-ए-हाज़िर मुकम्मल नहीं वक़्त पर कोई क़ादिर मुकम्मल हमारे तशख्खुस को क्या पूछते हो न कामिल मुसलमां न काफिर मुकम्मल
अब के बरस वतन का रहा हाल कुछ खराब आए न साथ ले के नया साल कुछ खराब दोज़ख़ में बैठ कर ये खयाल आए है अक्सर शायद रहे हों अपने भी आमाल कुछ खराब
वो तो खुश्बू है हवाओं में बिखर जाएगा होके हमसाये-सबा जाने किधर जाएगा मस’अला फूल का समझा था मगर ये पाया आख़िरश फूल भी कांटो सा नज़र आएगा
नई सड़क पे पुराने मकाँ सा लगता हूँ मैं टूटते हुए हिन्दोस्ताँ सा लगता हू कल मैं लगता था जिसे सारे जहाँ से अच्छा आज उस शख़्स को सारे जहाँ सा लगता हूँ
अपनी आदत से बाज़ आओ तुम इस क़दर प्यार मत लुटाओ तुम कई इनसान मुझमें छिपते हैं किस से मिलना है यह बताओ तुम याद तो रोज़ चली आती है भूले भटके ही चले आओ तुम
क्या बताऊँ कि मैं क्या से क्या हो गया इक तवायफ़ के पाज़ेब सा हो गया जिसको माना नहीं आज तक मर्द ने एक मजबूर औरत की ना हो गया
अपनी हद से गुज़र के देखूँगा अपनी किस्मत से लड़ के देखूँगा है मुहब्बत अदम की बरबादी फिर भी इक बार कर के देखूंगा
दुआ बाशक्ल सवाब ए जारिया खुदा करे कि नया साल इस क़दर गुज़रे मेरी पढ़ते हुए नमाज़ हर फजर गुजरे घनी जो छाँव तेरी रहमतों कि हो हम पर धूप का खौफ किसे हो जो यूं ज़ुहर गुजरे
मेरी मुश्किल पे मसखरी करता वह इनायत यही सही करता उसको मालूम भी नहीं होता और मैं उससे आशिक़ी करता हम भी होते किसी की जान-ए-ग़ज़ल कोई हम पर भी शायरी करता