खुद को मिला हूँ मैं तेरी खैरात की तरह
खुद को मिला हूँ मैं तेरी खैरात की तरह और लुट गया हूँ मैं मेरे जज़्बात की तरह मालूम है क़िस्मत में हमारे नहीं मगर मिलते भी नहीं हमको मुलाक़ात की तरह
Collection of Urdu Poetry
खुद को मिला हूँ मैं तेरी खैरात की तरह और लुट गया हूँ मैं मेरे जज़्बात की तरह मालूम है क़िस्मत में हमारे नहीं मगर मिलते भी नहीं हमको मुलाक़ात की तरह
कुछ वक़्त गुज़र सा जाने दो फिर याद मुझे तुम कर लेना सूरज को सर पर आने दो फिर याद मुझे तुम कर लेना है ढोंग हमारा रिश्ता अब तुम मानो या फिर ना मानो इस सच को घर कर जाने दो फिर याद मुझे तुम कर लेना
Ab aur kisi ko to hai bekaar deKHnaa Deewaanaa banke soorat e dildaar dekhnaa Aey zauq woh karta hai jab izhaar dekhnaa Hay lutf woh kare hai jo inkaar dekhnaa