Naye Saal Ke Naam
Governments will come and go,
The nation will survive.
In solidarity with those protesting against the CAA and NRC laws.… Read More Naye Saal Ke Naam
Collection of Hindi Poetry
Governments will come and go,
The nation will survive.
In solidarity with those protesting against the CAA and NRC laws.… Read More Naye Saal Ke Naam
तुम्हारे जाने के बाद कई दिनों तक तो दिल उदास रहा, और मुझे ये उम्मीद लगी रही कि शायद तुम वापस आओगी और सब कुछ पहले जैसा हो जाएगा।
A poem on the right to express oneself freely… Read More Khamosh Raho
A short love poem on inevitable separation – one lover is a modern sprawling Mumbai and the other a nostalgic bustling Kolkata… Read More लप्रेक: तुम बम्बई मैं कलकत्ता
A blank verse on the pretensions of poetry… Read More आज़ाद नज़्म का ढकोसला
A tribute to Faiz’s everlasting Gulon mein rang bhare… Read More फैज़ अहमद फैज़ के नाम
तुम कहते हो लिख लेने से दिल का कुछ ग़म घट जाएगा, मेरा रोना सुनकर सुनने वालों का दिल फट जाएगा । तुम कहते हो लिख लेने से लम्बी रातें कट जाएंगी, लंबी रातों का अंधियाला थोड़ा-थोड़ा छंट जाएगा । ये तुमसे किसने कहा मुझे अपना कुछ ग़म कम करना है ? मेरे सीने के… Read More मैं क्यों लिक्खूँ?
मैं कलंदर बन के तेरी याद में खो गया अपने दिल-ए-बर्बाद में दिल को ऐसा सा लगा था प्यार में कुछ बुरा होता नहीं संसार में
चलो, इंद्रधनुष के अंत तक चलें | सुना है वहाँ परियाँ मटकियों में सोने के सिक्के छिपाती हैं, वहाँ एक सपनों की दुकान करते हैं – हरे गुलाबी रजनीगंधा की खुशबू वाले दिन में टिमटिमाते सपने | उनको कोई ग़रीबन की बेटी बालों में जूड़े संग गूथ लेगी, या कोई फकीरन का बच्चा आँसुओं संग… Read More चलो, तुमको लेकर चलें
मैं कवि हूँ जब तक जीवन है तब तक मुझको लिखना होगा चाहे जितनी बाधाएं हो शब्दों का भेद बताने में हर भावना के भीतर छिपती भावों से प्रेम निभाने में चाहे जीतने भी दिन बीतें मानी मतलब समझाने में मैं खुद ही डूबा रह जाऊं उलझन अपनी सुलझाने में मदिराओं का हालाओं का रस… Read More Main kavi huuN jab tak jeevan hai tab tak mujhko likhnaa hogaa