वो बिगड़ता है तो बिगड़ जाए

वो बिगड़ता है तो बिगड़ जाए ये बता दे कि दिल किधर जाए मेरा दिल है गले का हार नहीं ज़रा सी चोट पे बिखर जाए ज़रा सा दर्द तो होगा लेकिन ये दुआ है कि दिल ठहर जाए

अब के बरस

अब के बरस वतन का रहा हाल कुछ खराब आए न साथ ले के नया साल कुछ खराब दोज़ख़ में बैठ कर ये खयाल आए है अक्सर शायद रहे हों अपने भी आमाल कुछ खराब

खुद को मिला हूँ मैं तेरी खैरात की तरह

खुद को मिला हूँ मैं तेरी खैरात की तरह और लुट गया हूँ मैं मेरे जज़्बात की तरह मालूम है क़िस्मत में हमारे नहीं मगर मिलते भी नहीं हमको मुलाक़ात की तरह