चलो, तुमको लेकर चलें

चलो, इंद्रधनुष के अंत तक चलें | सुना है वहाँ परियाँ मटकियों में सोने के सिक्के छिपाती हैं, वहाँ एक सपनों की दुकान करते हैं – हरे गुलाबी रजनीगंधा की खुशबू वाले दिन में टिमटिमाते सपने | उनको कोई ग़रीबन  की बेटी बालों में जूड़े संग गूथ लेगी, या कोई फकीरन का बच्चा आँसुओं संग… Read More चलो, तुमको लेकर चलें