कई इनसान मुझमें छिपते हैं

अपनी आदत से बाज़ आओ तुम इस क़दर प्यार मत लुटाओ तुम कई इनसान मुझमें छिपते हैं किस से मिलना है यह बताओ तुम याद तो रोज़ चली आती है भूले भटके ही चले आओ तुम

फिर याद मुझे तुम कर लेना

कुछ वक़्त गुज़र सा जाने दो फिर याद मुझे तुम कर लेना सूरज को सर पर आने दो फिर याद मुझे तुम कर लेना है ढोंग हमारा रिश्ता अब तुम मानो या फिर ना मानो इस सच को घर कर जाने दो फिर याद मुझे तुम कर लेना

चलो, तुमको लेकर चलें

चलो, इंद्रधनुष के अंत तक चलें | सुना है वहाँ परियाँ मटकियों में सोने के सिक्के छिपाती हैं, वहाँ एक सपनों की दुकान करते हैं – हरे गुलाबी रजनीगंधा की खुशबू वाले दिन में टिमटिमाते सपने | उनको कोई ग़रीबन  की बेटी बालों में जूड़े संग गूथ लेगी, या कोई फकीरन का बच्चा आँसुओं संग… Read More चलो, तुमको लेकर चलें