अब के बरस

अब के बरस वतन का रहा हाल कुछ खराब आए न साथ ले के नया साल कुछ खराब दोज़ख़ में बैठ कर ये खयाल आए है अक्सर शायद रहे हों अपने भी आमाल कुछ खराब