इक शायरा के नाम
वो तो खुश्बू है हवाओं में बिखर जाएगा होके हमसाये-सबा जाने किधर जाएगा मस’अला फूल का समझा था मगर ये पाया आख़िरश फूल भी कांटो सा नज़र आएगा
वो तो खुश्बू है हवाओं में बिखर जाएगा होके हमसाये-सबा जाने किधर जाएगा मस’अला फूल का समझा था मगर ये पाया आख़िरश फूल भी कांटो सा नज़र आएगा