मैं क्यों लिक्खूँ?

तुम कहते हो लिख लेने से दिल का कुछ ग़म घट जाएगा, मेरा रोना सुनकर सुनने वालों का दिल फट जाएगा । तुम कहते हो लिख लेने से लम्बी रातें कट जाएंगी, लंबी रातों का अंधियाला थोड़ा-थोड़ा छंट जाएगा । ये तुमसे किसने कहा मुझे अपना कुछ ग़म कम करना है ? मेरे सीने के… Read More मैं क्यों लिक्खूँ?

हमरक्स

मैं कलंदर बन के तेरी याद में खो गया अपने दिल-ए-बर्बाद में दिल को ऐसा सा लगा था प्यार में कुछ बुरा होता नहीं संसार में

खुद को मिला हूँ मैं तेरी खैरात की तरह

खुद को मिला हूँ मैं तेरी खैरात की तरह और लुट गया हूँ मैं मेरे जज़्बात की तरह मालूम है क़िस्मत में हमारे नहीं मगर मिलते भी नहीं हमको मुलाक़ात की तरह

फिर याद मुझे तुम कर लेना

कुछ वक़्त गुज़र सा जाने दो फिर याद मुझे तुम कर लेना सूरज को सर पर आने दो फिर याद मुझे तुम कर लेना है ढोंग हमारा रिश्ता अब तुम मानो या फिर ना मानो इस सच को घर कर जाने दो फिर याद मुझे तुम कर लेना