औक़ात ए खमसा
दुआ बाशक्ल सवाब ए जारिया खुदा करे कि नया साल इस क़दर गुज़रे मेरी पढ़ते हुए नमाज़ हर फजर गुजरे घनी जो छाँव तेरी रहमतों कि हो हम पर धूप का खौफ किसे हो जो यूं ज़ुहर गुजरे
दुआ बाशक्ल सवाब ए जारिया खुदा करे कि नया साल इस क़दर गुज़रे मेरी पढ़ते हुए नमाज़ हर फजर गुजरे घनी जो छाँव तेरी रहमतों कि हो हम पर धूप का खौफ किसे हो जो यूं ज़ुहर गुजरे